हेक नगर मां हेक अमीर सेठ रहता। ओ कन्नू घणा पेसा होणे चे बाद वी हमेसा डुक्खी रहता। हेक डियो घणा पिरोसान हुत्ती कन्न हेक बाबे कन्नू गेल्ला ते आपणी सारी पिरोसानी बाबे नूं ब़ावड़ली। ओण्हे सेठ ची बात बडे गोर लारे सुणली ता ओन्हूं कहले की काल इसे बेल्हे बलति तू मां कन्नू आयो। में काल तन्नू दुद्धिया पिरोसानिया चा हल बावड़ी। सेठ खुसी-खुसी घरे चाहला गेल्ला ता नेरे डियो बलति बाबे कन्नू आल्ला। ओण्हे डेखले की बाबा सड़के पे कस्सा सोधे ब़ेहलता ला। सेठ ने बाबे कन्नू पुछले, बाबा तू का सोधी ब़ेहला। बाबा ब़ोड़ला, “ माया हेक सोने चा सिक्का ढेती पल्ला। में ओन्हूं सोधे ब़ेहला पर मन्नू घणी देर हुत्ती गेल्ली मगर सिक्का लाभी ना पल्ला। हा बात सुणती कन्न सेठ वी सिक्का सोधू लागती गेल्ला। सोथे-सोथे घणी देर हुत्ती गेल्ली ता सेठ ने बाबे कन्नू पूछले, बाबा, सिक्का ढेला किट्ठे हुत्ता। बाबा ब़ोड़ला, माया सिक्का मायी झुपड़ी मां ढेला हुत्ता पर उट्ठे अंधारे घणे हुत्ते ए सांगू में सिक्का सड़के पे सोधे ब़ेहला।
सेठ चोंकती कन्न ब़ोडला, दुद्धा सिक्का झुपड़ी मां ढेला ता तू इट्ठे कां सोधी ब़ेहला। बाबा हंसती कन्न ब़ोड़ला की हा दुद्धे कलोखे सवाल चा जबाब छे, खुसी ता मन मां रिहे वे तू विन्नू पेसा मां सोधणे ची कोसिस करी पल्ला। ए सांगू तू घणा डुक्खी छी। हा बात सुणती कन्न सेठ बाबे चे पग मां ढेती पल्ला।
सीख – सब कोच्छ आपा कन्नू छे पर आप्पू वान्हूं इंगे-उगे सोधणे मां आपणा सम्मे बरबाद करती नाखू वी।