हेक घणे सोहणे गां हुत्ते। ओच्चे चारों मेर पहाड़ हुत्ते। पहाड़ा भांसू हेक सेर रहता। सेर जिसे बेल्हे दहाड़ता गांवा आल्ले डर्र कन्नू कांपू लागती जते। पाला घणा हुत्ता ता सारी जगा बरफ जमली पलती ली। सेर घणा भुक्खा हुत्ता। ओण्हे घणा डिया कन्नू कस्सा कोन्हीं खाले हुत्ते। ए सांगू ओ सिकार कल्ले पहाड़ा कन्नू तले उतरला ता गांवा मां घिरती गेल्ला। ओ सिकार सोहता फिर्रे ला। ओन्हूं हेक झुपड़ी डिसली। सेर ने सोचले इट्ठे खाणे कल्ले कस्सा ना कस्सा जरूर हुवी। ओ जत्ती कन्न जंगली लारे ब़ेसती रहला। झुपड़ी मूं ब़ाला चे रोवणे ची अवाज आवे पलती ली। सेर इंगे-उगे डेखती कन्न भीतर घिरे पलता ला ता ओन्हूं अस्तरी ची अवाज सुणीली “ चोप्प कर बेटा” लोम्बड़ी आवे पल्ली, कीतनी बडी लोम्बड़ी छे। मगर ब़ाला ने रोवणे बन्द नी करले। आई बलति ब़ोड़ली, ओ डेख भालू आवे पल्ला। मगर ब़ाल चोप्प नी हुल्ले। ओन्हूं डरावणे चा कुई फेदा नी हुल्ला।
जंगली लारे ब़ेहले सेर ने सोचले अजीब ब़ाल छे , जक्को लोम्बड़ी ते भालू कन्नू वी ना डर्री पल्ले। ओ डेख सेर आती गेल्ला, आई ब़ोड़ली। ओ डेख जंगली कन्नू भिल्ला। मगर ब़ाल चोप्प नी हुल्ले। सेर नूं बडा ताजूब हुल्ला। हिम्मा सेर नूं चिन्ता हूं लागती गेल्ली। आई बलति ब़ोड़ली, हा डेख बदाम, ब़ाल फोरन चोप्प हुत्ती गेल्ले। सेर ने सोचले, हा बदाम कूण छे? हा ता मां कन्नू वी घणा खतरनाख छे। सेर बदाम चे बारे मां सोचू लागती गेल्ला। ओ बेल्हे कुई चीज आती कन्न ओच्ची कड़ी पे ढेली आती। सेर आपणी जान बचाती कन्न दरोड़ला। ओण्हे सोचले कड़ी पे बदाम ढेला आती। असल मां ओच्ची कड़ी पे हेक चोर हुत्ता। चोर अंधारे मां सेर नूं गा समझती कन्न ऊपर कुदला। डरती ता चोर वी गेल्ला जिसे बेल्हे ओन्हूं पता लागला की ओ सेर ची कड़ी पे ब़ेहला ला।
सेर घणी तिक्खे पहाड़ा डुस दरोड़ला की बदाम तले ढेती पड़ो। मगर चोर सेर नूं कसती कन्न पकड़ती ब़ेसती रहला कां की ओन्हूं पता हुत्ता की तले ढेला ता सेर मन्नू मारती नाखी। सेर नूं आपणी जेन्द ची ते चोर नूं आपणी जेन्द बचावणे ची लागली फिर्रे ली। कतरा जी देरी मां डियो निकलने आल्ला हुत्ता। चोर नूं हेक बण ची डाली डिसली। ओण्हे डाली पकड़ली ते बणा पे चढ़ती कन्न लुकती गेल्ला। सेर ने वी चेन ची सांस गेहली की बदाम ता घणा खतरनाख छे।
सीख – बेन्न सोचले समझले कुई धन्धा नी करणा चाही छे।
- टिपणी डाक करा