हेक जुवान तपते रेगिस्तान मां घुमणे कल्ले गेल्ला। ओच्चे लारे हेक ऊंठ वी हुत्ता ते ऊंठ ची कन्डी पे घणा सारा समान वी लड़ली फिर्रे ला। ऊंठ ते जुवान डोन्हीं पघ्घरों पाणी हुल्ले फिर्री ले। गरमी मां थाकती कन्न जुवान ने सोचले हिम्मा मन्नू इट्ठे सई काढ़णी चाही छे। ओण्हे ऊंठ ची कन्डी कन्नू तम्बू उतारला ता ओन्हूं लाती कन्न ओच्चे भीतर जत्ती कन्न सई काढ़णे कल्ले ब़ेसती रहला। ऊंठ वी छाईं मां ब़ेसणा चहावे ला। जुवान ने डोन तीन घन्टे तम्बू मां सई काढ़ली। जिसे बेल्हे डियो थोवणे आल्ला हुत्ता ता उमस वी कम हुत्ती गेल्ली। ओ बेल्हे ओण्हे रोटी खाली ता ऊंठ ची कन्डी पे चढ़ती कन्न उगते टुरती पल्ला। ऊंठ वी ब़ड़हा मन मारती कन्न उगते टुरती पल्ला। रात हुत्ती गेल्ली ता मोसम वी ठाडा हुत्ती गेलता ला। रेगिस्तान मां डियो जितने गरम रिही वी ता रात उतनी ही ठाडी रिहे वे। आधी रात हुत्ते ही जुवान नूं घणा पाला लागू लागती गेल्ला। ओण्हे बलति ऊंठ नूं रोकले ते ओच्ची कन्डी कन्नू तम्बू उतारती कन्न लाती नाखला। ओच्चे मां अराम करणे ची सोचली। ए वारी ऊंठ पहले ही तियार भिलता ला ते ओ ब़ोडला, मालिक, मन्नू वी पाला लागला भिल्ला। मालिक ब़ोडला, “ता में का करे।” ओ चोप्पचाप तम्बू मां घिरती गेल्ला। ऊंठ बार नाला तम्बू मां ठोड घिराती कन्न ओ कन्नू पूछे की मालिक में वी आती जाये का।”
जुवान ने सोचले, यूं ता हा मन्नू नुझू नी डी। ओण्हे कहले की तू वी आपणे ठोड तम्बू मां घिरा जत्ती।” ऊंठ खोस्स हुत्ती गेल्ला। कतरा जीं देरी चे बाद ऊंठ बलति ब़ोडला, मालिक हिम्मा ता मन्नू मजा आवे पल्ला। माये ठोडा नूं पाला वी कोन्हीं लागे पल्ला। अगर तू बुरे ना मनी ता में आपणे आगले पग तम्बू मां घिरा वे जत्ती का?” जुवान ने सोचले एचे मां इसड़े बुरे का छे? ए सांगू ओण्हे आपणे पग संगोड़ले जत्ती ता ऊंठ ने आपणी गिच्ची ते आगले पग तम्बू मां घिराले जत्ती। जुवान हाली आधी नीडे मां हुत्ता की ऊंठ जोरा-जोरा चे सांकू लागती गेल्ला। जुवान ब़ोडला,“ हिम्मा का हुल्ले।” ऊंठ ब़ोडला, “मालिक यूं ता में बिमार हुत्ती जायी कां की माये आधे सरीर गरम ता आधे सरीर ठाडे हुवे पल्ले। डेखती गे अगर मे बिमार हुत्ती गेल्ला ता तन्नू आपणे घूमणे आधे मां ही छोड़ने पड़ी।” जुवान सोची मां पड़ती गेल्ला ता बलति ब़ोडला, “ता में का करे।” ऊंठ ब़ोडला, “मालिक करे का? में आपणे नेरे सरीर वी तम्बू मां करे जत्ती।” जुवान ब़ोडला, ना कर पल्ला। तम्बू मां डू जुवान जितनी जगा कोन्हीं।” ऊंठ ब़ोडला, “मालिक हा ता हो सगे की तूं ब़हारू नुत्थी रहे ता में भीतर नुत्थी रिहे। हा बात कहती कन्न ऊंठ भीतर घिरती गेल्ला ता जुवान सारी रात ब़हारू पल्ला रहला। यूं करती कन्न ऊंठ ने ओ कन्नू बदला गेहती गेल्ला ता ओच्चे लारे आपणा हसाब बराबर करला।
- टिपणी डाक करा