घणे डिय्हे पहले ची बात छे। हेक चिड़ी इसड़ी सड़के लारे रहती। जिसी लारे डाणा चे भरीले आल्ले टरक लंघते। डाणे इंगे-उगे खिन्डरती पड़ते वा जीं भरती कन्न डाणे चुगती। हेक डियो विणे सोचले की मन्नू इसड़ी तरकीब लावणे चाही छे की नेरी पक्खिये ए रस्ते पे नीं आवणी चाही छे नातण मन्नू खाणे कल्ले डाणे कम हुत्ती जाये। विणे नेरे पक्खिया नूं कहले, तम्ही इंगे ना जजा। इंगे जंगली जनावरे ते बडे-बडे टरक चल्ली वी। उट्ठू उडरती कन्न जल्दी-जल्दी महफूस जगा पे ना जा सगू वी। विच्ची बात सुणती कन्न सारी पक्खिये डरती गेल्ली।
हेक डियो वा सड़के पे डाणे चुगे ब़ेहलती ली। विणे हेक तिक्खी आती गड्डी ची अवाज सुणली। विणे पुट्ठे मुड़ती कन्न डेखले की हा ता हाली घणी दूर छे कतरा जीं नेरे डाणे चुगती गिहे। वा डाणे चुगणे मां इतनी खोती गेल्ली की विन्नू पता वी नी लागला की गड्डी किसे बेल्हे विच्चे लारे पुजती गेल्ली। वा उडर वी नीं सगली ते गड्डी चे पहिये तले आती गेल्ली। कतरा जी देरी मां सारे जंगला हल्ला मचती गेल्ला की अनुसासिका किट्ठे गेल्ली पत्ती। घणी देर सोधणे चे बाद वा लाभली ता वा मेली पलती ली। ओ वी वे सड़के पे जिसी सड़के पे अम्हा नूं आवणे कल्ले रोकती ता खोद्द डाणे चुगणे कल्ले आती जत्ती, सारी पक्खिये ब़ोड़ली।