(51) हेक्की रेलगड्डी तले साओ सरदार आती गेल्ले।
निन्याणवे मरती गेल्ले- -- हेक सरदार बचती गेल्ला।
रिपोटर ने पूछले ईं का हुल्ले?
सरदार ब़ोड़ला, गलत होके ची वजह कन्नू, होके मां बावड़ले गेल्ले कि सताब्दी एक्सपरेक्स पलेटफारम पे आवे पल्ली। ए सांगू सारे लोक डर कन्नू रेलवे ची पटरी पे चहाले गेल्ले, रेलगड्डी पलेटफारम पे ना आती कन्न पटरी पे चहाली आल्ली।
रिपोटर- तू बडा सियाणा हुत्ता, जक्को पटरी पे नी उत्तरला।
सरदार ब़ोड़ला, में ता रेलगड्डी तले मरणे कल्ले आलता। मगर गलत होके ची वजह कन्नू में पटरी कन्नू हटती कन्न पलेटफारम पे चाहला गेल्ला।
(52) जुवान- मास्टर नूं, साब माये छोर पड़ने मां कींवे छे?
मास्टर- तू ता ब़स हा समझती गे कि आरियभट ने जीरो ओच्चे कल्ले सोधली हुत्ती।
(53) मेडम- का हुल्ले रे, उत्तर ना डा आवी।
छोर- वा बात कोन्हीं मेडम, में जाये भरोसे पे पेपर डिऊं आलता। उं ता खोद्द मां कन्नू पुछ ब़ेहले।
(54) डोन यार आपस मां बाता करी ब़ेहलते।
पहला यार- घराल्ली घुस्सा घणा करे।
डूज्जा यार- मायी वी करती मगर हिम्मा ना करी वी।
पहला यार- इसड़े का हुल्ले।
डूज्जा यार- हेक डियो वा घुस्से मां हुत्ती, ता में विन्नू कहले ब़ुड्ढापे मां ता घुस्सा आती जाये वे। ब़स- - -
(55) हेक माच्छर मरती गेल्ला। ओच्चे मरणे चे जुरम मां किड़ी नूं पुलिस आल्ले पकड़ती गेल्ले।
पुलिस आल्ले ने किड़ी कन्नू पूछले, तू राती चे इसड़े का करले हुत्ते जक्को माच्छर मरती पल्ला।
किड़ी रोते हुवे ब़ोड़ली, साब मे ता कस्सा कोन्हीं करले। हा में राती चे मोरटीन ब़ालती कन्न नुल्ही हुत्ती।
(56) हेक जुवान रेलगड्डी मां जाये पलता ला ता ओ बेल्हे टी टी टिकट चेक करणे कल्ले आती गेल्ला।
टी टी- टिकट डिखाण।
जुवान- टिकट कोन्हीं।
टी टी- किट्ठे जाणे तन्नू।
जुवान- उट्ठे जाणे, जिट्ठे राम पेदा हुलता ला।
टी टी- हिम्मा चाल माये लारे।
जुवान- किट्ठे चालणे।
टी टी- जिट्ठे, किरसन पेदा हुलता ला।
(57) हेक जुवान ओढणा ची दुकान पे ओढणी गिहूं गेल्ला। ओ ओढणा ची गरन्टी ते रंग चे बारे मां पूछू लागती गेल्ला।
दुकानदार- भऊ,तन्नू कितने ओढण गेहणे?
जुवान ब़ोड़ला- मन्नू ब़स आद्धा मीटर ओढण गेहणे, टोपी सिवावणे कल्ले।
दुकानदार ने ओन्हूं आद्धा मीटर ओढण कतरती डिल्ले।
जुवान ब़ोड़ला, ओढणा ची गरन्टी का छे?
दुकानदार घुस्से मां ब़ोड़ला, दुद्धे ठोड फड़ीती जायी मगर ए ओढणा ची बणली आल्ली टोपी नी फड़ीजी।
(58) हेक भोला-भाला गांवां आल्ला, गांवां चे पंच नूं रोटी खुलावणे कल्ले हकारणा चहावे ला। ओ पंच कन्नू गेल्ला ता ओ कन्नू पूछले, तन्नू खाणे मां का आच्छे लागे वे।
पंच ब़ोड़ला- खाणे मां माछली आच्छी लागे वे।
गांवां आल्ला ब़ोड़ला, मायी टब़री नूं ता माछली ची भाजी रांधणे चा डा ना आवी।
पंच ने ओन्हूं कागस मां माछली ची भाजी रांधणे चा नुकसा लिखती डिल्ला।
गांवां आल्ला- माछलिया ची भाजी गेहती कन्न घरे जाये पलता ला ता रसते मां गेज्झ माछलिया खोसती चाहली गेल्ली। गांवां आल्ला ब़ोड़ला, जा चत्ती जा, रांधे कींवे, नुकसा ता मां कन्नू छे।
(59) हेक्के दुकानदार ने आपणे नोकर नूं हकारती कन्न ओ कन्नू भांसले डिय्हा ची बिकरी चे बारे मां पूछले, काल हेक्के डिय्हा मां ठोड दरद चा डोन हजार गोलिया कींवे बिकती गेलिया।
नोकर ब़ोड़ला- जी, आपणी दुकान लारे जक्को जगा छे, विच्चे मां कबि सम्मेलन हुत्ता।
(60) थाणेदार- जुवान कन्नू पूछले, दुद्धे का गार हुत्ती गेल्ले।
जुवान- पहले याददासत गार हुल्ली, हिम्मा मन्नू माये घर ही ना लाभी पल्ले।
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